लुधियाना के थाने में 7 महीने दौरान 4 SHO बदले:किसी ने 3 महीने भी पूरे नहीं किए; जब तक केस समझते हो जाता फेरबदल
लुधियाना के डिवीजन नंबर-3 थाने में SHO की कुर्सी पिछले सात महीनों से लगातार बदल रही है। जनवरी से अब तक चार इंस्पेक्टर इस पद पर तैनात किए जा चुके हैं, लेकिन इनमें से कोई भी तीन महीने का कार्यकाल पूरा नहीं कर सका। खास बात यह है कि यह बदलाव ऐसे समय में हो रहे हैं, जब इसी थाने से जुड़े पुलिस रिश्वत मामले में 10 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोर्ट में सुनवाई चल रही है। हर नए SHO को केस समझने के लिए लेना पड़ रहा समय मामले से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, जब भी नया SHO पद संभालता है तो कोर्ट में चल रहे भारी-भरकम रिकॉर्ड और केस की जानकारी हासिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा जाता है। अधिकारी एक-दो पेशियों में ही मामले को समझने की प्रक्रिया में होता है कि उसका तबादला हो जाता है। इसके बाद नया SHO आता है और उसे भी केस रिकॉर्ड समझने के लिए समय की जरूरत पड़ती है। इससे कोर्ट की कार्यवाही में बार-बार समय मांगने और तारीख बढ़ने की स्थिति बन रही है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि बार-बार SHO बदलने से पुलिस की ओर से कोर्ट में मामले की प्रभावी पैरवी और सहयोग प्रभावित तो नहीं हो रहा। यानी सात महीने के भीतर चार अधिकारियों ने SHO का पद संभाला। इनमें किसी का कार्यकाल तीन महीने तक नहीं पहुंचा। 28 वीडियो क्लिप में दिख रहे पुलिसकर्मियों की पहचान पर भी सवाल मामले में उस समय और गंभीरता बढ़ गई, जब लुधियाना की स्पेशल कोर्ट ने पुलिस द्वारा पेश किए गए 28 वीडियो क्लिप में दिखाई दे रहे व्यक्तियों की पहचान नहीं किए जाने पर चिंता जताई। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री, जिनके पास गृह विभाग भी है, के संज्ञान में मामला लाने के निर्देश दिए हैं। 2019-20 में सामने आया था रिश्वत का मामला यह मामला वर्ष 2019-20 का है। लॉटरी कारोबारी सुभाष केट्टी ने आरोप लगाया था कि पुलिसकर्मी लॉटरी विक्रेताओं से खुले तौर पर रिश्वत ले रहे हैं। उन्होंने कथित रिश्वतखोरी के वीडियो तत्कालीन पुलिस कमिश्नर राकेश अग्रवाल को सौंपे थे। आरोप है कि कार्रवाई नहीं होने पर केट्टी ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया। इसके बाद मार्च 2020 में FIR दर्ज की गई। 11 पुलिसकर्मी नामजद, 10 के खिलाफ चार्जशीट इस मामले में अब तक 11 पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों को केस में नामजद किया जा चुका है और 10 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। हालांकि शिकायतकर्ता सुभाष केट्टी का दावा है कि स्टिंग ऑपरेशन के दौरान 28 पुलिसकर्मी कैमरे में कैद हुए थे। ऐसे में उनका सवाल है कि वीडियो में दिखाई देने वाले सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इससे पुलिस कार्रवाई में चयनात्मकता और जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि पुलिस प्रशासन ने SHO के बार-बार तबादलों को इस मामले की सुनवाई से जोड़ने से इनकार किया है। पुलिस कमिश्नर स्वप्न शर्मा ने मीडिया से कहा कि लुधियाना बड़ा और घनी आबादी वाला शहर है। पुलिस पर काम का काफी दबाव रहता है। व्यवस्थाओं को बेहतर तरीके से चलाने के लिए अधिकारियों की समय-समय पर री-शफलिंग की जाती है।
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