100 करोड़ के मुआवजा घोटाले में विजिलेंस ने मांगी जानकारी:सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई पड़ताल, एसआईटी की 6 एफआईआर के दस्तावेज खंगाले जाएंगे
नोएडा में जमीन अधिग्रहण के दौरान किसानों को दिए गए अतिरिक्त मुआवजे के 100 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले की जांच अब विजिलेंस इकाई ने शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार की विजिलेंस इकाई ने मामले से जुड़े दस्तावेज जुटाने शुरू कर दिए हैं। इस मामले की जांच पहले शासन स्तर से गठित विशेष जांच दल (SIT) कर रहा था। एसआईटी ने जांच के दौरान छह मुकदमे दर्ज कराए थे। इनमें तीन मुकदमे किसानों को कथित तौर पर अतिरिक्त मुआवजा दिलाने और रकम हड़पने से जुड़े हैं, जबकि तीन मुकदमे नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में दर्ज किए गए हैं। विजिलेंस ने एसआईटी की ओर से दर्ज कराई गई छह एफआईआर से जुड़े दस्तावेजों को जांच के दायरे में लिया है। जिन लोगों को एफआईआर में नामजद किया गया है, उनके प्राधिकरण से जुड़े रिकॉर्ड, इस पूरे प्रकरण में उनकी भूमिका और संबंधित दस्तावेज मांगे गए हैं। इसके साथ ही प्राधिकरण से उन अधिकारियों और कर्मचारियों की जानकारी भी मांगी जा रही है, जिनकी इस प्रक्रिया में भूमिका रही। जमीन अधिग्रहण, मुआवजा निर्धारण और भुगतान से संबंधित फाइलों के साथ अधिकारियों की हस्ताक्षर करने की अधिकार सीमा (साइनिंग अथॉरिटी) का रिकार्ड भी जांचा जाएगा। तीन लोगों पर मुआवजे की रकम हड़पने का आरोप एसआईटी की एफआईआर में मुआवजे की रकम हड़पने और पीड़ितों के बैंक खाते खुलवाने से जुड़े मामले में और प्राधिकरण के तीन विधि अधिकारियों राजेश कुमार, दिनेश कुमार सिंह और वीरेंद्र कुमार नागर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले दर्ज किए गए हैं। विजिलेंस अब एफआईआर में शामिल सभी लोगों की भूमिका और उनके खिलाफ जुटाए गए साक्ष्यों की जांच करेगी। अधिकारियों पर 10 प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप एसआईटी की जांच में सामने आया था कि किसानों को अतिरिक्त मुआवजा दिलाने के बदले प्राधिकरण के अधिकारियों ने कथित तौर पर 10 प्रतिशत तक कमीशन नकद लिया। एसआईटी ने इस लेन-देन से संबंधित जानकारी भी अपनी रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी थी। जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में किसानों को निर्धारित मुआवजे से काफी अधिक रकम दी गई। अब विजिलेंस इस बात की जांच करेगी कि अतिरिक्त मुआवजा देने की प्रक्रिया में किस अधिकारी की क्या भूमिका थी और किस स्तर पर नियमों की अनदेखी की गई। प्राधिकरण से मांगे जा रहे सभी रिकॉर्ड विजिलेंस की ओर से प्राधिकरण से मामले से संबंधित फाइलें, नोटशीट, आदेश, मुआवजा निर्धारण से जुड़े दस्तावेज, भुगतान रिकॉर्ड, अधिकारियों के हस्ताक्षर और अधिकार क्षेत्र से संबंधित रिकॉर्ड मांगे जा रहे हैं। इसके अलावा एफआईआर में नामजद लोगों का प्राधिकरण से क्या संबंध रहा, किस अधिकारी के स्तर से कौन सा आदेश जारी हुआ और किसके हस्ताक्षर से भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ी, इसकी भी जांच होगी।
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